Rudrabhishek

Rudrabhishek is a ritual of worshipping Lord Shiva in his Rudra form, in which  water is continuously poured over Shivalinga, with alongwith chanting of vedic mantra called the Rudra Sukta also referred to as Rudri Paath. It is hailed by all Vedic scriptures as one of the greatest Poojas. Abhisheka is carried out with either Cow”s milk, Ghee, Curds, honey, finely ground sugar, Sugar cane juice, Coconut water or Ganga Jal, which are believed to be dear to Lord Shiva.

Rudrabhishek (रुद्राभिषेक)

Namaste

Rudrabhishek is Abhishek of Rudra. Rudrabhishek refers to the ritual bath of the Shiv Lingam. It is one of the most significant and popular ceremonies to please Lord Shiva and is seen as the greatest spiritual puja in all the Vedic scriptures. Performing this puja bestows one with health, wealth and happiness and offers protection against enemies, negativity, and evil.

The term ‘Rudra’ is used amply in the Vedas. Rudra means tempest or a violent storm. Rudra focuses on the destructive nature of Lord Shiva. Lord Shiva is both gentle and aggressive. He is both forgiving and merciless. He is everything. He is the beginning and he himself is the end. This is how his devotees perceive him.

The name Rudra is associated with 11 Rudras which were created by Lord Shiva namely:

Kapaali, Pingala, Bhima, Virupaksha, Vilohitaa, Ajesha, Shavasana, Shasta, Shambu, Chanda and, Dhruva.

Some philosophical and spiritual experts believe that Lord Shiva is called Rudra because of the Rudra Tandav dance. It is believed that a robust, fearless and enrage Shiva performs the Rudra Tandav dance in cremation grounds. He is unstoppable and furious.

Rudrabhishek puja is paramount. It is extremely important as a ritual. It is considered to be one of the finest, purest and compelling ritual in Hinduism. Lord Shiva, in the Rudrabhishek puja, is worshipped by giving him a sacred bath along with flowers and the necessary materials required in this puja.

There are broadly 6 types of Rudrabhishek:

Jal Abhishek:

For Vriddhi and fulfillment one’s desires.

Dudh Abhishek:

For longevity.

Shahad Abhishek

Shahad meaning honey. For freedom from all of life’s troubles and misfortunes.

Panchamrit Abhishek

Panchamrit is blended with 5 different elements namely milk, curd, jaggery, honey, and ghee. These 5 elements together form the panchamrit. They are offered to seek blessings for wealth and prosperity.

Ghee Abhishek

This prevents any form of illness or physical problems from falling on the devotee.

Dahi Abhishek

This helps a childless couple to have a child.

Rudrabhishek is an extremely powerful puja. It is performed to seek blessings and good health from God. Devotees offer Rudrabhishek to please Lord Shiva and seek his love care, protection, and blessings.

रुद्र अर्थात शिव के अभिषेक को रुद्राभिषेक कहा जाता है । शिव और रुद्र परस्पर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। शिव को ही ‘रुद्र’ कहा जाता है, क्योंकि रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानी कि भोलेनाथ  सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं ।

हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है।

रुद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त अनेक द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया गया है। साधक रुद्राभिषेक पूजन विभिन्न विधि से तथा विविध मनोरथ को लेकर करते हैं। किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिए तदनुसार पूजन सामग्री तथा विधि से रुद्राभिषेक किया जाता है।

रुद्राभिषेक के विभिन्न पूजन के लाभ इस प्रकार हैं:

• जल से अभिषेक करने पर वर्षा होती है।
• असाध्य रोगों को शांत करने के लिए कुशोदक से रुद्राभिषेक करें।
• भवन-वाहन के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।
• लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें।
• धनवृद्धि के लिए शहद एवं घी से अभिषेक करें।
• तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
• इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।
• पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से रुद्राभिषेक करें।
• रुद्राभिषेक से योग्य तथा विद्वान संतान की प्राप्ति होती है।
• ज्वर की शांति हेतु शीतल जल/ गंगाजल से रुद्राभिषेक करें।
• सहस्रनाम मंत्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धारा से रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है।
• प्रमेह रोग की शांति भी दुग्धाभिषेक से हो जाती है।
• शकर मिले दूध से अभिषेक करने पर जड़बुद्धि वाला भी विद्वान हो जाता है।
• सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रु पराजित होता है।
• शहद के द्वारा अभिषेक करने पर यक्ष्मा (तपेदिक) दूर हो जाती है।
• पातकों को नष्ट करने की कामना होने पर भी शहद से रुद्राभिषेक करें।
• गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।
• पुत्र की कामना वाले व्यक्ति शकर मिश्रित जल से अभिषेक करें। ऐसे तो अभिषेक साधारण रूप से जल से ही होता है।

परंतु विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में मंत्र, गोदुग्ध या अन्य दूध मिलाकर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सबको मिलाकर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है। इस प्रकार विविध द्रव्यों से शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने पर अभीष्ट कामना की पूर्ति होती है।

वेदों में विद्वानों ने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है। पुराणों में तो इससे संबंधित अनेक कथाओं का विवरण प्राप्त होता है। वेदों और पुराणों में रुद्राभिषेक के बारे में कहा गया है और बताया गया है कि रावण ने अपने दसों सिरों को काटकर उसके रक्त से शिवलिंग का अभिषेक किया था तथा सिरों को हवन की अग्नि को अर्पित कर दिया था जिससे वो त्रिलोकजयी हो गया। भस्मासुर ने शिवलिंग का अभिषेक अपनी आंखों के आंसुओं से किया तो वह भी भगवान के वरदान का पात्र बन गया। कालसर्प योग, गृहक्लेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यों की बाधाओं को दूर करने के लिए रुद्राभिषेक आपके अभीष्ट सिद्धि के लिए फलदायक है।

 

ज्योतिर्लिंग क्षेत्र एवं तीर्थस्थान तथा शिवरात्रि प्रदोष, श्रावण के सोमवार आदि पर्वों में शिववास का विचार किए बिना भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है। वस्तुत: शिवलिंग का अभिषेक आशुतोष शिव को शीघ्र प्रसन्न करके साधक को उनका कृपापात्र बना देता है और उनकी सारी समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाती हैं। अत: हम यह कह सकते हैं कि रुद्राभिषेक से मनुष्य के सारे पाप-ताप धुल जाते हैं।

स्वयं सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने भी कहा है कि जब हम अभिषेक करते हैं तो स्वयं महादेव साक्षात उस अभिषेक को ग्रहण करते हैं। संसार में ऐसी कोई वस्तु, वैभव, सुख नहीं है, जो हमें रुद्राभिषेक करने या करवाने से प्राप्त नहीं हो सकता है।

Video
Live Sankalp Video

*Live Webcast of Sankalp, prior to start of Abhishekam.

Man
Learned Purohit

Conducted by very experienced learned Vedic Purohits.

Yagna
Live Hawan

*Live Webcast of Hawan, after Completion of Abhishekam.

Prasadam
Prasadam

Dry Prasadam including Dry fruits, Vibhuti, Sindur, Mauli would be sent across.

* Live Webcast services are subject to internet connectivity and bandwidth availability, in the event of slow internet speed, a recorded video (also a part of the package) would be made available.Please note that Videography is prohibited in the sanctum sanctorum of most temples, hence Video footage of all events other than those performed within the sanctum sanctorum would be provided.

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